1. आपकी पुस्तक ‘दीपांजली’ जीवन के अनुभवों और भावनाओं से जुड़ी है। इस काव्य संग्रह को लिखने की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली और इसका नाम ‘दीपांजली’ क्यों रखा?
उत्तर-1. मुझे लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से ही रहा है। अपनी भावनाओं और विचारों को व्यक्त करने का एक सुन्दर माध्यम है – कविताएं। मैंने जो जिंदगी में अनुभव किया, जो समाज और देश में होता हुआ देखा उसे कविताओं ढालना शुरु किया। यह अपनी बात को दूसरों तक पहुँचाने का प्रभावशाली माध्यम है।
2. आपकी कविताओं में आशा और हौसले के साथ गहरी पीड़ा भी दिखाई देती है। क्या लेखन आपके लिए अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम है या स्वयं को संभालने की एक शक्ति?
उत्तर-2. लेखन मेरी भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम भी है और स्वयं को सम्भालने की शक्ति भी।
3. ‘तुम कहाँ चले गए’ और ‘तुम नहीं हो फिर भी’ जैसी कविताएँ बिछड़ने के दर्द को व्यक्त करती हैं। इन भावनाओं को शब्दों में ढालना आपके लिए कितना कठिन रहा?
उत्तर-3. ‘तुम कहाँ चले गए और तुम नहीं हो फिर भी’ जैसी कविताओं में मैंने अपने ही विरह के दर्द को व्यक्त किया है। लगभग दो वर्ष पहले जब मेरे पति का देहान्त हुआ वो वक्त मेरे लिए बहुत तकलीफ दायक था। उस समय जो मेरी भावनाएं थीं, जो मेरी हालत थी मैं जो अनुभव कर रही थी उसी को मैंने कविता का रूप दिया।
4. ‘नारी’, ‘नारी शक्ति’ और ‘तुम ऐसी नारी बनना’ जैसी रचनाओं के माध्यम से आप आज की महिलाओं को क्या संदेश देना चाहती हैं?
उत्तर-4. ‘नारी, नारी शक्ती और तुम ऐसी नहीं बनना’ जैसी रचनाओं के माध्यम से मैं महिलाओं को आत्मनिर्भर होने और अपने आत्म सम्मान की खुद रक्षा करने का सन्देश देना चाहती हूँ।
5. ‘दुनिया का चेहरा’ और ‘मेरा देश’ जैसी कविताओं में आपने सामाजिक समस्याओं पर सवाल उठाए हैं। क्या आप मानती हैं कि कविता समाज में वास्तविक बदलाव ला सकती है?
उत्तर-5. ‘दुनिया का चेहरा’ और ‘मेरे देश’ जैसी कविताओं में मैंने सामाजिक समस्याओं पर प्रभाव शाली ढंग से सवाल उठाए हैं जो लोगों को सोचने पर मजबूर करेंगे। इन कविताओं को पढ़कर पाठक खुद के अन्दर झांकने पर भी मजबूर होंगे। असली बदलाव हीं से शुरू होता है जहाँ लोगों को अपनी जिम्मेदारियों का अहसास हो।
6. ‘मेरी बिटिया’ और ‘मेरा शरारती बेटा’ जैसी कविताओं में पारिवारिक रिश्तों की खूबसूरती झलकती है। आपके जीवन में परिवार ने आपकी लेखन यात्रा को किस प्रकार प्रभावित किया?
उत्तर-6. मेरी लेखन यात्रा को शुरू करने का श्रेय मेरे परिवार को ही जाता हैं मेरे पति के देहान्त के बाद जब मेरी जिंदगी एक गहरे दर्द में डुबी हुई थी तब मेरे बच्चों ने मुझे बहुत ही अच्छे से संभाला और मुझे लिखने और पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। ताकि मैं व्यस्त होकर अपने दर्द से ऊपर आ जाऊं। वे मेरे हुनर और शौक को जानते थे।
7. आपकी रचनाओं ‘समय’, ‘आत्मबल’ और ‘संघर्ष’ में जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण दिखाई देता है। कठिन परिस्थितियों में आपको आगे बढ़ने की ताकत कहाँ से मिलती है?
उत्तर-7. कठिन परिस्थितियों में मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा अपने अन्दर से ही मिलती है। मैंने हर बार अनुभव किया है कि हिम्मत होसले और सकारात्मक सोच के साथ ही हम कठिन परिस्थितियों से निकल सकते हैं।
8. आपकी पुस्तक में देशप्रेम, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक जिम्मेदारियों को विशेष स्थान मिला है। एक कवयित्री के रूप में आप समाज के प्रति अपनी सबसे बड़ी जिम्मेदारी क्या मानती हैं?
उत्तर-8. कवयित्री के रूप में समाज के प्रति देश के प्रति मेरी जिम्मेदारी है कि मैं अपने लेखन के द्वारा समाज और देश को जागरूक करूँ और उनकी जिम्मेदारियों का अहसास कराऊं। जो मैंने ‘दीपांजली’ काव्य संग्रह में किया भी है।
9. ‘दीपांजली’ में व्यक्तिगत अनुभवों से लेकर समाज की वास्तविकताओं तक अनेक विषय शामिल हैं। इस संग्रह की कौन-सी कविता आपके हृदय के सबसे करीब है और क्यों?
उत्तर-9. ‘दिपांजली’ काव्य संग्रह में सभी कविताएं महत्वपूर्ण और मेरे दिल के करीब हैं। किसी एक कविता को दिल के सबसे करीब बताना अन्य कविताओं के साथ अन्याय होगा।
10. यदि ‘दीपांजली’ पढ़ने के बाद पाठक अपने जीवन में केवल एक सकारात्मक बदलाव लेकर जाएँ, तो आप चाहेंगी कि वह बदलाव क्या हो और क्यों?
उत्तर-10. ‘दिपांजली’ पढ़ने के बाद मैं पाठकों में यह बदलाव देखना चाहूँगी कि वे समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें, सबके साथ प्रेम, सहयोग से रहें, किसी को दुख ना पहुँचाएं।